B.Ed और D.El.Ed करने वालों के लिए बड़ी खबर! नया नियम जारी, पढ़ाई के नियम बदले B.Ed D.El.Ed New Rule 2026

By Meera Sharma

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B.Ed D.El.Ed New Rule 2026
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B.Ed D.El.Ed New Rule 2026: भारत में शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं के लिए वर्ष 2026 बेहद महत्वपूर्ण साबित होने वाला है। सरकार और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद ने शिक्षक प्रशिक्षण की पूरी व्यवस्था में बड़े बदलाव करने का फैसला किया है। नई शिक्षा नीति 2020 के तहत लाए जा रहे ये बदलाव पारंपरिक बी.एड और डी.एल.एड कोर्स के ढांचे को पूरी तरह से नया रूप देंगे। इन नए नियमों का सीधा असर शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों, छात्रों की पढ़ाई और सरकारी शिक्षक भर्ती प्रक्रिया पर पड़ेगा। सरकार का मुख्य जोर अब सिर्फ डिग्री बांटने पर नहीं बल्कि गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण और आधुनिक शिक्षण कौशल विकसित करने पर है।

नए नियमों में क्या बदलाव हो रहे हैं

अभी तक स्नातक की डिग्री पूरी करने के बाद दो साल का बी.एड कोर्स करना अनिवार्य था लेकिन नई व्यवस्था में स्नातकोत्तर यानी पोस्ट ग्रेजुएट छात्रों के लिए एक साल का बी.एड कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है। इसके अलावा बारहवीं कक्षा के बाद सीधे शिक्षक बनने की इच्छा रखने वाले विद्यार्थियों के लिए चार साल का एकीकृत शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम यानी आईटीईपी लागू किया जा रहा है। डी.एल.एड और बी.एल.एड जैसे पाठ्यक्रमों को भी धीरे-धीरे इसी एकीकृत ढांचे में शामिल किया जाएगा। यह बदलाव शिक्षक प्रशिक्षण को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से किए जा रहे हैं।

अलग-अलग कक्षाओं के लिए अलग योग्यता

नए नियमों के अनुसार प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर के शिक्षकों की ट्रेनिंग को अलग-अलग स्तरों पर मजबूत बनाया जा रहा है। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार कक्षा एक से पांच तक पढ़ाने के लिए अब बी.एड की डिग्री मान्य नहीं होगी और इसके लिए डी.एल.एड या आईटीईपी की योग्यता जरूरी होगी। नए पाठ्यक्रम में प्रौद्योगिकी, डिजिटल उपकरणों का उपयोग, बाल मनोविज्ञान और आधुनिक शिक्षण विधियों को विशेष स्थान दिया जा रहा है। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद केवल उन्हीं संस्थानों को मान्यता देगा जो निर्धारित गुणवत्ता मानकों और बुनियादी सुविधाओं को पूरा करेंगे।

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छात्रों और शिक्षा व्यवस्था को मिलने वाले लाभ

इन नए बदलावों से शिक्षक बनने की पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और व्यावसायिक हो जाएगी। विद्यार्थियों को कम समय में बेहतर गुणवत्ता का प्रशिक्षण मिल सकेगा और उनकी डिग्री का मूल्य भी बढ़ेगा। स्कूलों को ऐसे शिक्षक मिलेंगे जो केवल अपने विषय की जानकारी ही नहीं रखते बल्कि आधुनिक शिक्षण विधियों में भी पूरी तरह प्रशिक्षित होंगे। इस नई व्यवस्था से नकली कॉलेजों और कमजोर प्रशिक्षण संस्थानों पर लगाम लगेगी। हालांकि शुरुआत में प्रतिस्पर्धा थोड़ी बढ़ सकती है लेकिन दीर्घकाल में यह शिक्षा की गुणवत्ता और सरकारी शिक्षक भर्तियों के स्तर दोनों को मजबूत बनाएगा।

नए पाठ्यक्रमों के लिए पात्रता शर्तें

एक साल के बी.एड कार्यक्रम में प्रवेश के लिए संबंधित विषय में स्नातकोत्तर डिग्री होना आवश्यक होगा। चार साल की स्नातक डिग्री पूरी करने वाले विद्यार्थी भी इसके लिए पात्र माने जा सकते हैं। चार साल के एकीकृत शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम में प्रवेश के लिए बारहवीं कक्षा उत्तीर्ण होना जरूरी होगा। प्रवेश की प्रक्रिया राष्ट्रीय या राज्य स्तर की प्रवेश परीक्षाओं के माध्यम से की जा सकती है। इसके लिए शैक्षणिक योग्यता से जुड़े सभी प्रमाण पत्र और अंकपत्र, पहचान पत्र जैसे आधार कार्ड, पासपोर्ट साइज फोटो और प्रवेश परीक्षा से संबंधित दस्तावेज जरूरी होंगे।

नई व्यवस्था की विशेषताएं और उद्देश्य

इस नई व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि शिक्षक बनने की पूरी यात्रा अब एक स्पष्ट और एकीकृत ढांचे में होगी। एकीकृत कार्यक्रम के माध्यम से छात्र कम उम्र में ही व्यावसायिक प्रशिक्षण शुरू कर सकेंगे। पाठ्यक्रम की रूपरेखा में व्यावहारिक प्रशिक्षण, स्कूलों में इंटर्नशिप और तकनीक आधारित सीखने को विशेष महत्व दिया गया है। सरकार और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद का मुख्य उद्देश्य स्कूली शिक्षा की नींव को मजबूत करना है। नई शिक्षा नीति के तहत यह माना गया है कि योग्य और प्रशिक्षित शिक्षक ही मजबूत शिक्षा प्रणाली की असली नींव हैं। इन बदलावों से भारत में शिक्षक शिक्षा अंतरराष्ट्रीय मानकों के करीब पहुंचेगी और छात्रों को बेहतर करियर के अवसर मिलेंगे।

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Meera Sharma

Meera Sharma is a talented writer and editor at a top news portal, shining with her concise takes on government schemes, news, tech, and automobiles. Her engaging style and sharp insights make her a beloved voice in journalism.

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